लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विश्व शांति संबंधी विचारों का अध्ययन

By : राजबीर सिंह दलाल , सुनील कुमार

Page No: 126-143

सार
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (1916-1968) एक दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राजनेता थे, जिनकी एकात्म मानववाद और अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उत्थान) की विचारधाराएँ वैश्विक शांति और न्यायसंगत विकास के लिए एक वैकल्पिक मॉडल पेश करती हैं। पश्चिमी पूंजीवाद और माक्र्सवादी समाजवाद दोनों को अस्वीकार करते हुए, उपाध्याय ने एक विकेंद्रीकृत, सांस्कृतिक रूप से निहित आर्थिक प्रणाली की वकालत की, जो आध्यात्मिक कल्याण के साथ भौतिक प्रगति का सामंजस्य स्थापित करती है। एकात्म मानववाद व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन पर जोर देता है, जबकि अंत्योदय हाशिए पर पड़े लोगों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है। इस शोधपत्र में यह जाँचने का प्रयास किया गया है कि ये सिद्धांत संघर्ष समाधान, गरीबी उन्मूलन और पारिस्थितिक स्थिरता में कैसे योगदान करते हैं तथा आज की ध्रुवीकृत दुनिया में इसकी प्रासंगिकता क्यों और कितनी हैं? भारत सरकार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित अंत्योदय अन्न योजना (AAY) जैसी कल्याणकारी योजनाओं का विश्लेषण करके और उनके विचारों की तुलना गांधीवादी, बौद्ध दर्शन तथा पाश्चात्य दृष्टिकोणों से करके, यह शोध समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक सद्भाव के माध्यम से वैश्विक शांति को बढ़ावा देने में उनकी क्षमता पर प्रकाश डालने का एक लघु प्रयास है।

लेखक
प्रोफेसर (डॉ.) राजबीर सिंह दलाल, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा (हरियाणा)।
सुनील कुमार, शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा (हरियाणा)।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.04.9

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