लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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बिना विवाह संस्कार के सह-जीवनः भारतीय समाज और कानूनी परिप्रेक्ष्य में लिव-इन रिलेशनशिप का विश्लेषण

By : आशा

Page No: 95-108

सार
यह अध्ययन भारत में सह-जीवन संबंधों की विकसित होती प्रवृत्ति का समालोचनात्मक विश्लेषण करता है, जिसकी ऐतिहासिक जड़ें प्राचीन सहमति-आधारित विवाहों जैसे गंधर्व विवाह में निहित हैं। भारत में तीव्र शहरीकरण, वैश्वीकरण और बदलते लैंगिक मानदंडों के बीच, सह-जीवन संबंध पारंपरिक विवाह का एक वैकल्पिक रूप बनकर उभरे हैं, जो बढ़ती व्यक्तिगत स्वायत्तता और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों में परिवर्तन को दर्शाते हैं। यद्यपि इन संबंधों के प्रचलन में वृद्धि हो रही है, फिर भी ये कानूनी रूप से अस्पष्ट और सामाजिक रूप से विवादास्पद बने हुए हैं, विशेषकर क्षेत्रीय और पीढ़ीगत विविधताओं के संदर्भ में। ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेपों ने कुछ हद तक कानूनी सुरक्षा प्रदान की है, फिर भी एक समर्पित विधिक ढाँचे की अनुपस्थिति में ऐसे संबंधों में रहने वाले-विशेष रूप से महिलाएँ और बच्चे-असुरक्षा के शिकार होते हैं। यह शोध परंपरा और आधुनिकता के बीच जटिल अंतर्क्रिया को रेखांकित करता है, जो भारत में अंतरंग साझेदारियों को आकार दे रही है, और व्यापक विधिक सुधार, जन-जागरूकता तथा समावेशी नीतिगत उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अंततः, सह-जीवन संबंध भारत के व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रतीक हैं, जो रूढ़िवादी मान्यताओं को चुनौती देते हुए विविध पारिवारिक संरचनाओं में पहचान, समानता और गरिमा की वकालत करते हैं।

लेखक
डाॅ. आशा, सीनियर साइंटिस्ट, छत्तीसगढ़ ऐक्शन रिसर्च टीम (कार्ट), रायपुर, छत्तीसगढ़।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.04.7

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