लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारत में बाल श्रम उन्मूलन हेतु किए गए संवैधानिक एवं विधिक प्रावधान

By : निधि लोधी , कविराज

Page No: 32-51

सार
बालश्रम एक विश्वव्यापी समस्या के साथ साथ मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। यह बच्चों के विकास में बाधा उत्पन्न करता है, जिसका प्रभाव बच्चों पर शारीरिक और मानसिक रूप से पड़ता है। बालश्रम की समस्या प्राचीन काल से किसी-न-किसी रूप से विद्यमान रही है। यह समस्या औद्योगीकरण और नगरीकरण के विकास के साथ वर्तमान समय में विकराल रूप धारण करती जा रही है। बाल श्रम की समस्या केवल आर्थिक शोषण की अभिव्यक्ति नहीं करता अपितु यह सामाजिक विकास में अवरोध पैदा करके अन्य समस्याओं को जन्म देता है। विश्व में लगभग सभी देश बाल श्रम उन्मूलन के लिए सरकारी व गैर सरकारी प्रयास कर रहे हैं, फिर भी बाल श्रम की समस्या निरंतर बनी हुई है। भारत में बाल श्रम की समस्या को बाल श्रम अधिनियम 1986 और राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना द्वारा संबोधित किया जाता है। आज भारत में 10.12 मिलियन से अधिक बच्चे हैं जो स्कूल जाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के बजाय अपना बचपन कालीन बुनाई, बीड़ी बनाने, घरेलू श्रम, कृषि, आतिशबाजी और परिधान निर्माण और अनगिनत अन्य व्यवसायों को सीखने में बिता रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में प्रस्तुत शोध पत्र में भारत में बाल श्रम की समस्या, बंधुआ बाल श्रम, बाल श्रम के परिणाम और शोषण का विश्लेषण किया गया है। भारत में बाल श्रम की स्थित के बारे में बताया गया है। अंत में, यह शोध पत्र मुख्य रूप से बाल श्रम की रक्षा के लिए भारत सरकार की नीतिगत पहलों और भारत में बालश्रम उन्मूलन के लिए किये गए संवैधानिक एवं विधिक प्रावधान पर केंद्रित है।

लेखक
निधि लोधी, शोध छात्रा, राजनीति विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
प्रोफेसर कविराज, आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.04.3

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