लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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डिजिटल इंडिया और वसुधैव कुटुम्बकम् : मानव-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था के लिए लोक प्रशासन की पुनर्संकल्पना

By : जनक सिंह मीना, मीनाक्षी

Page No: 14-31

सार
इक्कीसवीं सदी में लोक प्रशासन एक नए परिवर्तन से गुजर रहा है- पारंपरिक पदानुक्रमित नौकरशाही से भागीदारीपूर्ण, प्रौद्योगिकी संचालित और नैतिक रूप से आधारित शासन की ओर बढ़ रहा है। भारत का डिजिटल इंडिया मिशन इस परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो प्रशासनिक सुधार को तकनीकी नवाचार के साथ एकीकृत करता है। परंतु यह केवल एक तकनीकी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह वसुधैव कुटुम्बकम् की सभ्यतागत भावनाकृ“विश्व को एक परिवार मानने” के दृष्टिकोण को भी मूर्त रूप देता है। यह शोधपत्र तर्क प्रस्तुत करता है कि डिजिटल इंडिया और वसुधैव कुटुम्बकम् का संगम शासन की एक नई परिकल्पना प्रस्तुत करता है- जो मानव-केंद्रित, समावेशी और मूल्याधारित है दक्षता और करूणा, नवाचार और नैतिकता के समन्वय के माध्यम से भारत का डिजिटल मॉडल दर्शाता है कि प्रशासनिक आधुनिकीकरण वैश्विक सहयोग और नैतिक उत्तरदायित्व के साथ सह-अस्तित्व में रह सकता है। इंडिया स्टैक, जैम ट्रिनिटी, MyGov और प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान जैसी पहलें इस आदर्श को साकार करती हैं, जो अभिगम्यता, जवाबदेही और नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित करती हैं। न्यू पब्लिक मैनेजमेंट और डिजिटल एरा गवर्नेंस की बहसों के संदर्भ में, भारत का यह दृष्टिकोण वैश्विक लोक प्रशासन को एक नैतिक और सहानुभूतिपूर्ण प्रतिमान प्रदान करता है।

लेखक
प्रोफेसर (डॉ.) जनक सिंह मीना, प्रोफेसर, गाँधीवादी विचार एवं शांति अध्ययन विभाग समाज विज्ञान संस्था, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, कुन्ढेला, गुजरात।
मीनाक्षी, शोधार्थी, गाँधीवादी विचार एवं शांति अध्ययन विभाग समाज विज्ञान संस्था, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, कुन्ढेला, गुजरात।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.04.2

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