लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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प्रवासन एवं असंगठित क्षेत्र मे कामगार महिलाएँः एक जेंडर परिप्रक्ष्यात्मक दृष्टिकोण

By : मोनिका वर्मा , विभूति भूषण मलिक

Page No: 138-159

सार
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखण्ड सहित ई0ए0जी0 (एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप) राज्यों में शहरीकरण का निम्न स्तर, औद्योगीकरण की कमी, तथा अन्य सामाजिक सुिवधाओं की कमी के कारण अन्य राज्यों की तुलना में, पलायन दर अधिक हैं, (सिंह, 2020)। अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन) के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में प्रवासन का अति महत्वपूर्ण कारक जलवायु प्रभाव है। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में बुंदेलखण्ड क्षेत्र की पहचान प्रदेश के सबसे कम विकसित भागों में से एक के रूप में की गई है जो अत्यधिक सूखे, कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या, अत्यधिक गरीबी के कारण भुखमरी से प्रभावित है, जिसके कारण सीमांत किसान तथा  खेतिहर मजदूर बड़े पैमाने पर आजीविका के लिए पलायन करते रहे हैं। दशकों से, बुंदेलखंड क्षेत्र में, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन एक साधारण मुद्दा बना  हुआ है। लेकिन वर्तमान समय में, इस प्रक्रिया में और तीव्रता आई है। पहले आर्थिक प्रवास को सिर्फ पुरुषों से ही जोड़कर देखा जाता था लेकिन अब मौसमी अस्थायी प्रवासन में महिलाओं की संख्या में भी वृ़ि़द्ध हुई हैं, (श्रीवास्तव, 2005)। प्रवासन का जेंडर संवेदी अध्ययन समाजशास्त्र के तत्कालीन प्रमुख उभरते  दृष्टिकोणों में से एक है। शोधपत्र में अन्तरानुभागीय दृष्टिकोण से महिला प्रवासन में जेंडर, जाति, आयु एवं वर्ग के मध्य पारस्परिक सम्बन्धों का गहनता से विश्लेषण किया है। समाज में महिलाओं एवं पुरूषों की निर्धारित भूमिका विविधता के कारण पुरूषों की तुलना में महिलाओं के लिए प्रवास अनुभव भी अलग होते है। प्रस्तुत  शोधपत्र में आंकड़ों के आधार पर महिला प्रवासन को बाध्य करने वाले प्राथमिक कारक जैसे गरीबी, अल्परोजगार और बेरोजगारी आदि की जाँंच की गई है तथा प्रवासित महिलाओं को असंगठित श्रम क्षेत्रांे में होने वाली मुख्य सामाजिक, आर्थिक एवं लैंगिक चुनौतियों को चिन्हित किया गया है। 

लेखक
मोनिका वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय, आगरा।
प्रो. विभूति भूषण मलिक, आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.02.10

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