लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
भारतीय नारीवादी आन्दोलन की प्रमुख लहरे एक विश्लेषण
By : ममता कुमारी , भारती सेहता
Page No: 119-137
सार
नारीवादी आन्दोलन से तात्पर्य ऐसी विचारधारा से है जिसमें महिला अधीनता के प्रमुख कारकों को चुनौती प्रस्तुत कर एक ऐसे सामाजिक संरचना की स्थापना करना है जहाँ विभिन्न लिंग के ‘मनुष्य’ को मनुुष्य माना जाए तथा एक समतामूलक राज्य की स्थापना हो सके। प्रस्तुत शोध पत्र को पाँच भागों में विभाजित किया गया है। इसके पहले भाग में, नारीवाद के वैश्विक सन्दर्भ को समझने का प्रयास किया गया है। दूसरे भाग में, भारत में नारीवादी आन्दोलन की पहली लहर का विश्लेषण किया गया है। तीसरे भाग में, नारीवादी आन्दोलन की दूसरी लहर को समझने का प्रयास किया गया है। चौथे भाग में, नारीवादी आन्दोलन की तीसरी लहर को समझने के साथ नारीवाद के समक्ष चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। पाँचवें भाग में, वर्तमान समय में नारीवाद किन चुनौतियों का सामना कर रहा है, आदि पर प्रकाश डालने की कोशिश करेगा।
लेखक
ममता कुमारी, शोधार्थी, स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार।
भारती सेहता, सहायक प्राध्यापक. स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.02.9