लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
पर्यावरण संतुलित विकास की संकल्पना, संभावनाएँ एवं मार्ग
By : ऋचा बंसल
Page No: 109-118
सार
हमारे आस-पास बढ़ते अनियंत्रित विकास और शहरीकरण से प्लास्टिक एवं जल प्रदूषण, अवैध रेत खनन, अपशिष्ट डंपिंग, वननाशन, वन्य जीवन एवं जैव विविधता की हानि, आदि समस्याएँ उत्पन्न हो रहीं हैं, जिससे छत्तीसगढ़ अछूता नहीं है। भारत में कुल उत्पन्न सीवेज एवं कचरे का और छत्तीसगढ़ में एक-तिहाई अपशिष्ट का ही प्रबंधन हो पा रहा है। इस लेख में धारणीय विकास की अवधारणा के साथ-साथ पर्यावरण संतुलित विकास, जो कि विकास के प्रमुख प्रकारांे में से एक है, का छत्तीसगढ़ जैसे जनजाति बहुल राज्य में कैसे प्राप्त किया जा सकता है, प्रस्तुत किया गया है। इस लेख में सतत् या धारणीय विकास के विभिन्न आयाम- औद्योगिक विकास, शहरी विकास, संतुलित कृषि विकास, और आदिवासी विकास के बारे में प्रकाश डाला गया है, तथा बढ़ते जल और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने हेतु सुझाव दिए गए हैं।
लेखक
ऋचा बंसल, सहायक प्राध्यापक राजनीति विज्ञान, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.)।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.02.8