लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
भारतीय लोकतंत्र एवं मीडियाः एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
By : संतोष कुमार सिंह
Page No: 1-11
सार
दुनिया के लोकतांत्रिक देशों में भारत एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकार ही भारतीय नागरिकों को दुनिया के अन्य ऐसे कई देशों से अलग करता है जहाँ लोकतांत्रिक शासन प्रणाली भिन्न-भिन्न है। लोकतंत्र की अवधारणा है- जनता द्वारा, जनता के लिए और जनता का शासन। भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति के उल्लेख के आधार पर ही हम मीडिया का चौथा स्तम्भ, सजग प्रहरी और न जाने कितने उपमाओं से अलंकृत करते हैं। अभिव्यक्ति का अधिकार और मीडिया (प्रेस) की स्वतंत्रता दोनों अलग-अलग पहलू हैं लेकिन समय और आवश्यकता के अनुसार इनके आयामों में परिवर्तन होता रहा है। समकालीन परिदृश्य में मीडिया एक उद्योग का रूप ले चुका है। जब हम भारतीय लोकतंत्र की चर्चा करते हैं तो इसका अभिप्राय यह है कि भारत के सभी नागरिकांे को वे सभी अधिकार प्राप्त हैं, जिनका वर्णन भारतीय संविधान में किया गया है। भारतीय लोकतंत्र की गरिमा को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मीडिया के ऊपर है। समय के साथ मीडिया की भूमिका में भी परिवर्तन आया है। संचार क्रांति का इसमें सबसे अधिक योगदान है। हालाँकि, इससे मीडिया के सामने विश्वसनीयता और लोकप्रियता के द्वन्द में तथ्यपरक प्रस्तुति की चुनौती भी बढ़ी है। भारतीय मीडिया का विकास भी इसी परिप्रेक्ष्य में हुआ है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर मीडिया की जाँच होती रही है। क्या वास्तव में मीडिया लोकतंत्र को बचाए और बनाए रखने में कितना सफल और असफल रहा है, इसका मूल्यांकन करना समकालीन परिदृश्य में एक अनिवार्य विषय बन गया है।
लेखक
संतोष कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, रानी धर्म कुँवर राजकीय महाविद्यालय दल्लावाला - खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.02.1