लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारत में दलीय राजनीति एवं चुनावी प्रक्रियाः चुनौतियाँ एवं सुधार

By : देवेन्द्र प्रताप तिवारी , शशिकांत पांडेय

Page No: 121-141

सार
भारत एक जीवंत और सशक्त लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक नियमित अंतराल पर चुनावों का होना हैं। ये ऐसे माध्यम हैं जिनके द्वारा लोगों के अपने राजनीतिक वातावरण के प्रति दृष्टिकोण, मूल्य और विश्वास परिलक्षित होते हैं। चुनाव, नेताओं के चयन और नियंत्रण के लिए केंद्रीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। चुनाव लोगों को समय-समय पर सरकार में अपना विश्वास व्यक्त करने और आवश्यकता पड़ने पर इसे बदलने का अवसर प्रदान करते हैं। चुनाव लोगों की संप्रभुता का प्रतीक हैं और सरकार के अधिकार को वैधता प्रदान करते हैं। इस प्रकार, लोकतंत्र की सफलता के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अपरिहार्य हैं। ब्रिटिश विरासत को जारी रखते हुए, भारत ने संसदीय लोकतंत्र को चुना है। 1952 से, देश ने राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर विधायी निकायों के लिए चुनाव देखे हैं। इसके कामकाज में विकृतियाँ पहली बार पाँचवें आम चुनाव (1971) में दिखाई दी और ये लगातार होने वाले चुनावों में और भी बढ़ गईं, खासकर अस्सी के दशक और उसके बाद हुए चुनावों में। कई बार चुनाव आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अपनी चिंता और बेचैनी व्यक्त की है।
भारत में चुनाव संबंधी कानूनी ढांँचे में कई खामियाँ हैं। दुर्भाग्य से, पिछले कुछ वर्षों में भारत की विभिन्न सरकारें चुनावी सुधारों को लेकर गंभीर नहीं रही हैं। घोटाले और विवाद एक स्थापित प्रवृत्ति बन गए हैं, जहाँ छोटे और क्षेत्रीय दलों ने सीट शेयरिंग, मनी लॉन्ड्रिंग, ब्लैकमेलिंग, राजनीति का अपराधीकरण, काले धन का प्रवाह जैसे विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्रीय दलों को बंधक बना रखा है। उपरोक्त सभी कारक बताते हैं कि हमारे देश में सतत् चुनावी सुधार की आवश्यकता है। भारत में चुनावी प्रक्रिया को स्वच्छ करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा कई नई पहले की गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश भर में कई मंचों और मीडिया में इस पर चर्चा हुई है।

लेखक
देवेन्द्र प्रताप तिवारी, सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान विभाग, आर. डी. एस. कॉलेज,मुजफ्फरपुर।
शशिकांत पांडेय, सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान विभाग, एल. एस. कॉलेज, मुजफ्फरपुर।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.01.10

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