लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
व्यावसायिक सगठनों की भूमिका और उत्तरदायित्व: गुजरात के पाँच जिलो का रचनात्मक विश्लेषण
By : विनायक राय , प्रवीन झा , संगीता
Page No: 95-106
सार
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व से तात्पर्य कॉर्पोरेट प्रशासन की उन रणनीतियों से है, जिनका उपयोग व्यावसायिक फर्म अपने परिचालन के क्षेत्र में लोगों को सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करने के लिए करती हैं। इस अवधारणा का उपयोग व्यावसायिक वातावरण में वर्षों से किया जा रहा है, लेकिन इसकी उपयोगिता विशेष रूप से वैश्वीकरण के बाद के युग में अधिक स्पष्ट रूप से महसूस की गई है। हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के कारण हमने व्यावसायिक दुनिया में काम करने वाली बड़ी कंपनियों का अचानक आगमन देखा है। ये कंपनियाँ न केवल अपने लाभ को अधिकतम करने के लिए व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, बल्कि अपनी रणनीतिक योजना और प्रबंधन में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को शामिल करके अपने ग्राहक समर्थन आधार को व्यापक बनाने का भी प्रयास कर रही हैं। यहाँ यह समझना महत्वपूर्ण है कि वे इस प्रयास में सफल हैं या नहीं? इस लेख का उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रावधानों की जाँच करना है और यह देखना है कि 2013 का यह अधिनियम किस प्रकार व्यावसायिक संगठन के लाभ को सामाजिक निर्माण और कल्याण की ओर मोड़ने में सफल रहा है।
लेखक
विनायक राय, एम. कॉम, दिल्ली विश्वविद्यालय।
प्रवीन झा, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय।
संगीता, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.01.8