लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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मानव अधिकार के जनजातीय पहलु

By : शिव कुमार मीणा

Page No: 82-94

सार
मानव अधिकारों का घोषणा पत्र मानव की अस्मिता, उसके स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा की रक्षा और चिंता में तैयार किया गया था। मानवीय शोषण, परतंत्रता तथा पराधीनतासे संपूर्ण मानव समाज को मुक्ति दिलाना ही इसका उद्देश्य था। इसीलिए यह समझना आवश्यक है कि आखिर जनजाति समाजों के लिए मानव अधिकारों की क्या प्रासंगिकता है। प्रस्तुत लेख का आशय इन्हीं मुद्दों का परीक्षण तथा इस संबंध में राजस्थान के दक्षिण भाग के जनजाति बहुल तीन जिलों में इसके प्रति जागरूकता का विश्लेषण करना है।

लेखक
शिव कुमार मीणा, पी.एच.डी. शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.01.7

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