लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी) और भारतीय संघवादः एक आलोचनात्मक विश्लेषण

By : शम्भू नाथ दुबे

Page No: 49-64

सार
आर्थिक सुधार की दिशा में भारत सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया। वैश्वीकरण व् वैश्विक संस्थाओं के परिपेक्ष्य में कर सुधार के रूप में जी.सी.टी ने कई केंद्रीय और राज्य करों को एक ही ढाँचे में बदलकर देश की कर संरचना को बदल दिया। सरकारी रिपोर्ट, अकादमिक साहित्य और कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे वैश्विक संघीय मॉडल के अध्ययन सहित माध्यमिक स्रोतों पर आधारित एक गुणात्मक पद्धति अपनाई गई। इसका प्राथमिक उद्देश्य यह आकलन करना है कि जीएसटी ने केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों को कैसे बदल दिया है, विशेष रूप से राज्य की स्वायत्तता और सहकारी संघवाद पर इसका प्रभाव पड़ा है। ‘‘एक राष्ट्र, एक कर‘‘ प्रणाली स्थापित करने के लिए एक ऐतिहासिक परिवर्तन के रूप में घोषित किए जाने के बावजूद, जीएसटी का भारतीय संघवाद पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। यद्यपि, निर्णय लेने का केंद्रीकरण, राजस्व के लिए केंद्र पर निर्भरता और राज्य की वित्तीय स्वायत्तता के क्षरण ने इस परिचर्चा के लिए प्रेरित किया है कि क्या जीएसटी भारतीय संविधान में निहित संघवाद के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है? क्या अतिरिक्त सहायता, योजनाओं में देरी और असहमति, मुख्यतया आर्थिक मंदी के दौरान, जी.सी.टी ने केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद को बढ़ा दिया है। अंततः कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसी संघीय व्यवस्थाओं के साथ तुलना करके केंद्रीकृत कर प्रशासन और राज्य सरकारों की स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाने में आने वाली कठिनाइयों को दर्शाता गया हैं। यह शोध-पत्र भारत के राजकोषीय संघवाद को बढ़ाने के प्रस्तावों का विश्लेषण, जैसे कि जीएसटी परिषद् की गतिशीलता को बदलना, राजस्व-साझाकरण व्यवस्था में सुधार करना और क्षमता निर्माण के माध्यम से राज्यों को सशक्त बनाना और भारत के संघीय ढाँंचे का समर्थन करने के लिए अधिक समतावादी और सहयोगात्मक ढांँचे की आवश्यकता पर जोर देता है।

लेखक
शम्भू नाथ दुबे, सह-आचार्य, ए.आर.एस.डी. कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2025.17.01.5

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