लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

300

उत्तराखंड राजनीति एवं महिला उत्थान - एक विश्लेषण

By : अनामिका चौहान

Page No: 117-132

Abstract
उत्तराखंड में महिलाओं के उत्थान की प्रक्रिया समय के साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बदलावों को लेकर सामने आई है। राज्य की महिलाएँ अपनी पारंपरिक सीमाओं को पार करते हुए विभिन्न आंदोलनों और संगठनों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। चिपको आंदोलन, जिसमें महिलाओं ने जंगलों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, एक प्रमुख उदाहरण है, जिसने न केवल पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका को उजागर किया, बल्कि उन्हें सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता के नए आयाम दिए। इसके अलावा, पंचायत चुनावों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, विशेष रूप से 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण, उनके राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुए हैं। उत्तराखंड में महिलाओं को अब भी कई सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जैसे पितृसत्तात्मक समाज, शिक्षा की कमी, और आर्थिक निर्भरता। फिर भी, महिलाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, और स्वरोजगार के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न अभियान, जैसे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ“ और “महिला सुरक्षा अभियान“, ने महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की है। इस लेख में उत्तराखंड में महिला उत्थान की प्रक्रिया और इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।

Author
अनामिका चौहान,
सहायक प्रोफेसर, चमनलाल महाविद्यालय, लंढौरा, हरिद्वार, उत्तराखंड।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.04.9

© All Rights Reserved 2025, Prints Publications Pvt. Ltd.

Powered by : Prints Publications Pvt Ltd