लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारत के आंतरिक सुरक्षा ढाँचे को सुव्यवस्थित करने एवं भविष्य की चुनौतियों से लड़ने हेतु व्यापक सुधारों की जरूरत

By : विनोद कुमार त्रिवेदी

Page No: 55-75

Abstract
किसी भी राष्ट्र की स्थिरता और सुरक्षा तथा उसकी विकास और आर्थिक प्रगति के बीच एक घनिष्ठ संबंध मौजूद रहता है। समृद्धि और आर्थिक विस्तार के लिए एक स्थिर और मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र आवश्यक है क्योंकि कोई भी देश अस्थिर वातावरण में विकास और उन्नति नहीं कर सकता। यदि हम भारत के सुरक्षा तंत्र की बात करें तो पाएंगे कि यहाँ एक बहुत ही जटिल आंतरिक सुरक्षा संरचना अस्तित्व में है, जिसमें कई एजेंसियां समान तरह के कार्य कर रही हैं और साथ ही, यह आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों की एक विस्तृत श्रृंखला का सामना भी कर रही है। जिसमें मुख्यतः देश के समक्ष मौजूद सुरक्षा चुनौतियों जैसे आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और अंतर-सांप्रदायिक संघर्ष जैसे पारंपरिक खतरों से लेकर प्रौद्योगिकी और वैश्वीकरण की प्रगति द्वारा लाई गई नए युग की चुनौतियाँ जैसे साइबर सुरक्षा, डिजिटल युद्ध, डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित चुनौतियाँं, सोशल मीडिया पर गलत सूचना से लेकर प्रौद्योगिकी-आधारित जासूसी तक सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त पर्यावरण और जलवायु संबंधी चुनौतियाँ, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, खाद्य और जल सुरक्षा, स्वास्थ्य और महामारी, जैविक और परमाणु खतरे, संसाधन आवंटन तथा जातीय और भाषाई संघर्ष जैसी समकालीन उभरती जटिलताएं कुछ ऐसी हैं जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए समान रूप से खतरनाक हैं। ये चुनौतियाँं गतिशील प्रकृति की हैं जिनसे निपटने हेतु समय रहते रणनीतिक सोच और अनुकूलनीय नीतियों के साथ राष्ट्र की व्यापक आंतरिक सुरक्षा संरचना पर काम करने की जरूरत हैं। इस हेतु देश के उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों के पुनर्गठन और पुनः आवंटन के माध्यम से देश का एक कॉम्पैक्ट, एकीकृत और भविष्योन्मुख आंतरिक सुरक्षा ढाँचा तैयार किया जाए जिससे कि भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूती प्रदान की जा सके एवं देश में उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग संभव हो सके। यह आंतरिक सुरक्षा सुधारों और अन्य प्रमुख देशों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को अपनाते हुए मौजूदा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकता है। 2047 के लिए भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुसार एक सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राष्ट्र सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत आंतरिक सुरक्षा तंत्र स्थापित करने के लिए समान तरह से कार्य कर पाने में सक्षम संस्थानों एवं बलों के एकीकरण एवं पुनर्गठन के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मितव्ययी और चुस्त बनाने की आवश्यकता हैं।

Author
विनोद कुमार त्रिवेदी,
रिसर्च स्कॉलर और ग्रुप ए अधिकारी सीआरपीएफ कैडर (2005 बैच) वर्तमान में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत हैं।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.04.5

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