लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
महिलाएँ, पंचायत और आरक्षणः एक विश्लेषण
By : रिंकी
Page No: 32-38
Abstract
वर्तमान संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण विषय स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी को लेकर देखा जा सकता है। स्थानीय स्तर पर शासन में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने में 73वें संविधान संशोधन की भूमिका के महत्त्व को स्वीकार किया जाता रहा है। जिसके अंतर्गत स्थानीय स्तर पर महिलाओं की शासन में भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की व्यवस्था की गई है। समय-समय पर पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण को लेकर सकारात्मक व नकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए जाते रहें हैं। इस संदर्भ में इस पेपर के अंतर्गत यह देखने का प्रयास किया गया है कि इतने वर्षों के पश्चात भी क्या वास्तव में इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित् हो पाई है या महिलाएँ अभी भी इस क्षेत्र में सामाजिक, सांस्कृतिक व पितृसत्ता के प्रभावों को झेलती हैं। वर्तमान समय में इस तथ्य को मेरे द्वारा हरियाणा राज्य में मनरेगा जैसी नीतियों के संदर्भ में प्राथमिक सर्वेक्षण के माध्यम से परखा गया है जहाँ मनरेगा के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रखी गयी है। जिसमें महिलाएँ नीतियों और कार्यक्रम के कार्यान्वयन व महिलाओं के कल्याण में सकारात्मक भूमिका निभा सकती हैं। मनरेगा में महिला सरपंचों की भूमिका महिलाओं के कल्याण में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस परिस्थिति में परिवर्तन न सिर्फ महिलाओं के कल्याण के लिए आवश्यक है बल्कि नीतियों की सफलता के लिए भी आवश्यक है।
Author
रिंकी, सहायक प्रोफेसर, राजनीतिक विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.04.3