लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
भारतीय संविधान के पचहत्तर वर्ष: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
By : संतोष कुमार सिंह
Page No: 14-31
Abstract
किसी भी देश का संविधान एक दिन की उपज नहीं होता है। इस दृष्टि से यह कहा जा सकता है कि संविधान एक ऐतिहासिक विकास का परिणाम होता है। अतएव भारतीय संविधान के आधुनिक और विकसित स्वरूप को समझने के लिए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का ज्ञान अनिवार्य है। भारतीय संविधान, अपने निर्माताओं की दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है। इसने शासन, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास की जटिलताओं तथा चुनौतियों के बीच राष्ट्र का मार्गदर्शन किया है। सटीकता और लगन के साथ तैयार किए गए इस आधारभूत दस्तावेज ने भारत की सांस्कृतिक, भाषाई और क्षेत्रीय विरासत के विविधता से परिपूर्ण ताने-बाने को एक साथ बुना है। भारत के संविधान ने लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता और समानता की आधारशिला को सशक्त किया है। हमारे संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्र भारत के जिस संविधान का निर्माण किया है, उसमें भारत की प्राचीन संस्कृति के सिद्धान्तों और मूल्यों के प्रत्येक आयाम को स्पर्श किया है। अतः भारत का संविधान हर कालखंड में जनहित की कसौटी पर खरा उतरने के साथ-साथ अपनी निरंतरता, उपयोगिता और प्रासंगिकता को सदैव सिद्ध किया है। भारत अपने संविधान के 75 वर्ष ( 26 नवम्बर, 1949 - 26 नवम्बर, 2024) पूर्ण होने पर पर्व मना रहा है। इस दृष्टि से भारतीय संविधान की गरिमापूर्ण यात्रा का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना अनिवार्य हो जाता है।
Author
संतोष कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, रानी धर्म कुँवर राजकीय महाविद्यालय दल्लावाला - खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.04.2