लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
सुदूर संवेदन और भौगोलिक सूचना प्रणाली में साइबर सुरक्षा एवं डेटा गोपनीयता की चुनौतियाँ एवं समाधान
By : शशि भूषण
Page No: 176-196
Abstract
वर्तमान डिजिटल युग में, रिमोट सेंसिंग (RS) और भू-स्थानिक सूचना प्रणाली (GIS) प्रौद्योगिकियों का उपयोग बढ़ता जा रहा है, जो डेटा संग्रह, विश्लेषण और भंडारण की नई संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।हालांकि, इन प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता की चिंताएँ भी महत्त्वपूर्ण हो गई हैं। सुदूर संवेदन अथवा रिमोट सेंसिंग (RS) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के एकीकरण से स्थानिक डेटा विश्लेषण में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिससे विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए शक्तिशाली उपकरण उपलब्ध हुए हैं। हालांकि, इस एकीकरण के साथ-साथ कई साइबर सुरक्षा जोखिम भी उत्पन्न होते हैं। यह पेपर RS और GIS से संबंधित साइबर सुरक्षा चुनौतियों की जाँच करता है, जिसमें डेटा की अखंडता, उपलब्धता और गोपनीयता शामिल हैं।
यह शोध-पत्र विभिन्न प्रकार के साइबर खतरों और कमजोरियों की पहचान करता है, जिनसे RS और GIS प्रणालियाँ प्रभावित हो सकती हैं। इनमें डेटा ब्रीच, साइबर हमले, मैलवेयर, और अन्य सुरक्षा खतरों का विश्लेषण शामिल है। इसके अलावा, यह अध्ययन उन मौजूदा सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन करता है जिन्हें इन खतरों से बचने के लिए लागू किया जा सकता है। इसमें डेटा एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण प्रक्रियाएँ, और नियमित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण जैसे उपाय शामिल हैं।
यह शोध-पत्र उभरती तकनीकों और उनके सुरक्षा पर प्रभावों पर भी चर्चा करता है। नई तकनीकों का विकास, जैसे कि मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा को और मजबूत बना सकता है, लेकिन इन तकनीकों के उपयोग में भी नई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। केस स्टडीज और सुझावों के माध्यम से, यह शोध-पत्र RS और GIS प्रणालियों की साइबर सुरक्षा की गहन समझ प्रदान करता है और संबंधित जोखिमों को कम करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ पेश करता है।
अंततः, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि RS और GIS में साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से बल्कि नैतिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण है। इस दिशा में निरंतर शोध और उन्नत तकनीकों का विकास आवश्यक है, ताकि इन प्रणालियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
Author :
डाॅ. शशि भूषण : वैज्ञानिक, पर्यावरण शोध एवं ग्रामीण विकास संस्थान, पटना।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.03.13