लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
बैगा जनजातियों का सामाजिक जीवन एवं समस्याएं: एक समाजशास्त्राीय अध्ययन
By : दीपक कुमार खरवार , विभूति भूषण मलिक
Page No: 145-163
Abstract
सदियों से आदिवासी समाज प्राकृतिक परिवेश में रहते रहे हैं एवं अपनी आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहे हैं जिसके कारण इनकी अपनी एक अलग संस्कृति विकसित हो गयी हैं। शायद इसलिए आदिवासियों एवं पर्यावरण के बीच एक घनिष्ठ संबंध पाया जाता हैं, (सरकार एवं दासगुप्ता, 2000)। लेकिन विकास एवं आधुनिकीकरण के कारण इनके सामाजिक जीवन पद्धति में परिवर्तन होने लगा है। बैगा समुदाय की सामाजिक संरचना काफी पुरानी और अनूठी है। उनकी यह व्यवस्था अपने अनोखेपन के साथ अभी तक चल रही है। समय-समय पर दूसरे समुदायों द्वारा कई तरह के हस्तक्षेप का सामना करने के बावजूद बैगा समुदाय अपनी परम्पराओं के साथ जीवन-यापन कर रहा है। लेकिन समय के साथ उनके सामाजिक जीवन में अब परिवर्तन होने लगा है। बैगा समुदाय से जुड़ी सामाजिक व्यवस्था के अध्ययन से पता चलता है कि यह समुदाय अब गरीबी, भुखमरी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार जैसी सुविधाओं से वंचित है और बुनियादी आवश्यकताओं के लिए जूझ रहा है।
प्रस्तुत शोध पत्री बैगा जनजातियों का सामाजिक जीवन एवं समस्याएं: एक समाजशास्त्रीय अध्ययनी में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद की बैगा जनजातियों के सामाजिक जीवन एवं उनके समक्ष मौजूद समस्याओं के विश्लेषण पर आधारित है। इस शोध पत्र में प्राथमिक तथ्यों के आधार पर समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य से यह जानने का प्रयास किया गया है कि स्वतंत्रता के सात दशक बाद जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तब आधुनिकता के इस दौर में बैंगा जनजातीय समुदाय की सामाजिक जीवन एवं उनके स्थितियों में कितना सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। उपरोक्त पृष्ठभूमि में यह शोध पत्र बैंगा जनजातीय समुदाय और विकास के इस क्रम में उनके सामाजिक जीवन में कितना परिवर्तन हुआ है को नए परिप्रेक्ष्य से समझने में सहायक होगा।
Authors:
डाॅ. दीपक कुमार खरवार, पोस्ट-डाक्टरल फेलो (ICSSR), समाजशास्त्र विभाग, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ।
प्रो. विभूति भूषण मलिक, आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.02.10