लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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उपाश्रित जनजातीय विकास में पेसा अधिनियम का विश्लेषणात्मक अध्ययन: राजस्थान के संदर्भ में

By : शिव कुमार मीणा

Page No: 133-144

Abstract
उपाश्रित यानि समाज का कमजोर व दलित वर्ग। यह वर्ग सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक आदि सभी रूपों में शेष समाज से काफी पिछड़ा है। इस वर्ग को विकास के प्रयासों व योजनाओं में कोई स्थान प्राप्त नहीं हुआ। स्वतत्रंता के बाद भारतीय समाज में उपाश्रित वर्ग (अनुसूचित जनजातियों) के सामने गरीबी, स्वास्थय, अशिक्षा, पिछड़ापन, विस्थापन आदि अनेक समस्याएं थी। इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही संविधान निर्माताओं ने संविधान में अनुसूची 5 शामिल की। जिसने अनुसूचित जनजातियों के विकास के रास्ते खोले। इसी क्रम में पेसा अधिनियम 1996 पारित किया गया। जो उपाश्रित वर्गों (अनुसूचित जनजातियों) को स्थानीय स्वशासन का अधिकार देता है। प्रस्तुत शोध में इस अधिनियम का ही राजस्थान के संदर्भ में विश्लेषण किया गया है। 

Author : श्री शिव कुमार मीणा, पी.एच.डी. शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.02.9

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