लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारत में लोकलुभावन राजनीति एवं संसदीय लोकतंत्रा की गतिशीलता

By : अंशु कुमार

Page No: 78-96

Abstract
यह शोधपत्र भारत में लोकलुभावनवाद और संसदीय लोकतंत्र के बीच के संबंधों को प्रस्तुत करता है। लोकलुभावनवाद एक राजनीतिक विचारधारा है जो अभिजात्य वर्ग के विरूद्ध आम जनता और उनके हितों पर ध्यान केन्द्रित करती है। आजादी के बाद से लोकलुभावनवाद राजनीति में भारत एक प्रभावशाली शक्ति रहा है। विभिन्न दलों के नेता जनता से अपील करने के लिए लोकलुभावनवादी भाषणों का प्रयोग करते हैं। उपलब्ध साहित्य और केस स्टडीज के आधार पर, यह शोधपत्र तर्क देता है कि लोकलुभावनवादी शासन व्यवस्था संभावित रूप से संसदीय लोकतंत्र के  सिद्धांत को कमजोर कर सकती है, जैसे शक्तियों का पृथक्करण, कानून का शासन आदि। हालाँकि, भारत में लोकलुभावनवाद के उदय ने राज्य की आर्थिक स्थितियों के बारे में भी चिंता बढ़ा दी है। यह शोधपत्र लोकलुभावनवाद, लोकलुभावनवाद की राजनीतिक अर्थव्यवस्था और भारत के संसदीय लोकतंत्र पर लोकलुभावनवाद के प्रभाव पर हुए बहसों का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है और उन चुनौतियों का पता लगाता है जिनका देश को इन दोनों के बीच सामंजस्य बिठाने में सामना करना पड़ता है।

Author : श्री अंशु कुमार, पीएच. डी. स्कॉलर, सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज, जेएनयू, नई दिल्ली। और सहायक आचार्य, आर्यभट्ट कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.02.6

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