लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
महिला सशक्तीकरण की चुनौतीः नारी शक्ति वंदन अधिनियम का एक आलोचनात्मक अध्ययन
By : शुभ्रा परमार , विजय शंकर चौधरी
Page No: 58-77
Abstract
नारी शक्ति वंदन अधिनियम नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने का प्रयास करता है। यह अधिनियम समानता, समावेशिता, और महिलाओं के सशक्तीकरण का समर्थन करता है। यह अधिनियम महिलाओं को पुरुषों के साथ समान अधिकारों और अवसरों की पहुँच प्रदान करता है। यह अधिनियम समाज के अलग-अलग वर्गों, जातियों, और समुदायों में महिलाओं की समावेशिता को प्रोत्साहित करता है। इसका उद्देश्य है समाज के हर वर्ग में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना ताकि समाज समृद्ध हो सके। इस अधिनियम के माध्यम से समाज में एक समरस, न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज की स्थापना की जा सकती है, जहाँ हर व्यक्ति को उसकी क्षमताओं और प्रतिभा के आधार पर समान अवसर प्राप्त हो सके। प्रस्तुत शोध-आलेख में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी तथा इस अधिनियम से भारत की महिलाएं किस प्रकार लाभान्वित हो सकती हैं उसकी समीक्षा की जाएगी।
Authors:
डॉ. शुभ्रा परमार : सहायक प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय।
विजय शंकर चौधरी : शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी (बिहार)।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.02.5