लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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डजिटल लामबंदीकरण और पर्यावरणीय जागरूकताः एक विश्लेषण

By : मनीष कुमार , सुजीत कुमार चौधरी

Page No: 27-39

Abstract
आज विश्व के समक्ष पर्यावरणीय समस्याएँ सभी समस्याओं में सर्वोपरि हैं। प्राकृतिक संसाधनों के अनुचित दोहन और पर्यावरणीय नैतिकता का तथाकथित विकसित होनें के क्रम में पीछे छूटना एक अंधकारमय भविष्य की ओर इंगित कर रहा है। समस्त राष्ट्रों और उनकें लोगों के बीच आभासीय मंचन के द्वारा सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और परिस्थितिकीय समस्याओं को लेकर गंभीर संवाद की उपस्थिति दर्ज होती दिख रही है (बेनेट एवं अन्य, 2014)। यह अध्ययन सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से सोशल मीडिया के द्वारा पर्यावरणीय जागरूकता को प्रखर बनानें की भूमिका की पड़ताल करता है। विगत कुछ वर्षो में पर्यावरण के संतुलन और वैश्विक जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताएँ बढ़ी हैं। आज इन समस्याओं का समाधान आभासी पटल पर खोजा जा रहा है। आज सभी समस्यात्मक विषय डिजिटलीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। समस्याओं के निराकरण हेतु डिजिटल लामबंदीकरण की जा रही है, जिसकी पहुँच महानगर से लेकर गाँव तक सुलभ हो रही है। यह शोध पत्र मुख्य रूप से पर्यावरणीय नैतिकता और जागरूकता में डिजिटल पटल की भूमिका और डिजिटल लामबंदीकरण की प्रकिया पर प्रकाश डालता है।

Authors:
श्री मनीष कुमार :
पीएच.डी स्कॉलर, समाजशास्त्र-विभाग, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय।
डा. सुजीत कुमार चौधरी : सह  आचार्य  और विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र-विभाग, महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.02.3

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