लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
सामाजिक योजनाओं के परिशोधन में नागरिक फीडबैक: सुशासन की आवश्यकता
By : युवराज कुमार
Page No: 16-26
Abstract
जैसा कि हम जानते हैं भारत एक कल्याणकारी राज्य है। जिसका प्रावधान भारतीय संविधान के अध्याय चार अनुच्छेद 36 से 51 ‘राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों’ के अंतर्गत किया गया है। वास्तव में ‘निदेशक सिद्धांत’ प्रत्येक शासन एवं प्रशासन की सफलता और असफलता का एक प्रमाणपत्र है। इसमें समाज में रहने वाले सभी धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग से संबंधित, सरकार को लोक कल्याणकारी योजनाओं, नीतियों तथा कानूनों का निर्माण के लिए निर्देश दिए गए है। निर्देशक सिद्धांत के अनुरूप ही कल्याणकारी योजनाएं बनायीं जाती हैं। बजट के दौरान इन योजनाओं की घोषणा तथा समय-समय पर नीति एवं कानूनों का निर्माण करके इनका क्रियान्वयन किया जाता है। इन योजनाओं और कानूनों का प्रभाव एवं परिणाम दोनों नागरिकों के प्रभाव एवं लाभ पर निर्भर करता है। इसी आधार पर नागरिक, सरकार के कार्य, नीतियों एवं योजनाओं तथा कानूनों का समर्थन करते हैं। परिणामस्वरूप आने वाले चुनावों में जनता सरकार को पुनः समर्थन देकर या निर्वाचित करके सत्ता में आसीन रखती है या सिरे से नकार देती है। दूसरे शब्दों में कहे तो यह कल्याणकारी योजनाएं वास्तव में नागरिकों के फीडबैक (प्रतिक्रिया) के द्वारा सरकारों की सफलता और असफलता का एक मापदंड है।
Author : डाॅ. युवराज कुमार, सहायक आचार्य, राजनीतिक विज्ञान विभाग, शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, भारत।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.02.2