लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
भारत में शिक्षा क्षेत्र में नीतियों और उपलब्धियों का आकलन
By : प्रवीण कुमार झा , विनायक राय , संगीता
Page No: 89-101
Abstract
आज सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि “हमारी आबादी के बड़े हिस्से को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं एवं सुविधाएं कैसे प्रदान की जाएं जो वर्तमान में इन सेवाओं से वंचित हैं।” शिक्षा वह महत्वपूर्ण कारक है जो गरीबों को विकास प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सशक्त बनाने की क्षमता रखती है। यह स्पष्ट है क्योंकि शिक्षा ही विकास-सुधार का मूल निर्धारक कारक है। यह, एक ओर, मानव क्षमता को विकसित करने में मदद करता है, दूसरी ओर सक्षम लोगों को विकसित करने में मदद करता है। आज नागरिकों को राष्ट्र के विकास के कार्य में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सरकार इन मापदंडों के तहत स्थितियों को ऊपर उठाने के लिए नई और अभिनव योजनाएं बना रही है और संसाधनों का आवंटन कर रही है लेकिन क्या वह लक्ष्य हासिल करने में सफल रही है? आज क्या हम वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्वयं को विकसित कह सकते हैं? देश में कुछ हद तक आर्थिक और सामाजिक प्रगति तो हुई है लेकिन क्षेत्रवार, जातिगत और लिंगवार में समान रूप से प्रगति नहीं हुई है। इस लेख का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में बनाई गई नीतियों और उनके कार्यान्वयन का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना है ताकि इसकी सीमित सफलता के कारण और भविष्य में हमारे बेहतर स्थिति (अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकासात्मक पैमाने पर) के लिए प्रयोग किए जा सकने वाले विकल्पों का पता लगाया जा सके।
Authors :
प्रो. (डाॅ.) प्रवीण कुमार झा : प्रोफेसर, राजनीतिक विभाग, शहीद भगत सिंह काॅलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय।
श्री विनायक राय : एम काॅम, दिल्ली विश्वविद्यालय।
प्रो. (डाॅ.) संगीता, प्रोफेसर : राजनीतिक विभाग, शहीद भगत सिंह काॅलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.01.7