लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारतीय न्यायपालिका पर मीडिया ट्रायल का प्रभावः आलोचनात्मक विश्लेषण

By : आशुतोष मीणा

Page No: 34-44

Abstract
निष्पक्ष न्याय के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता आवश्यक है। भारतीय संविधान में स्वतंत्र न्यायपालिका का प्रावधान है। न्यायपालिका की कार्यवाही में विधायिका व कार्यपालिका का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए ताकि न्यायपालिका निष्पक्ष निर्णय कर सके। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। इस स्वतंत्रता के आधार पर मीडिया समाचारों की रिपोर्टिंग करता है। मीडिया द्वारा अदालतों में विचाराधीन मामलों की सनसनीखेज रिर्पोटिंग कर दी जाती है जिससे न्यायपालिका के पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने व न्यायिक निर्णय प्रभावित होने की संभावना रहती है। हाई प्रोफाइल मामलों में मीडिया द्वारा अनवरत रिपोर्टिंग से मामले को इतना प्रचारित कर दिया जाता है कि न्यायधीश कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों व सबूतों से इतर अलग धारणा बना सकते हैं। मीडिया द्वारा बनाए गए माहौल से न्यायधीश की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। मीडिया ट्रायल न्यायधीश को आरोपी के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए मजबूर कर सकती है, भले ही आरोपी निर्दोष हो। यह शोध पत्र इस बात पर केंद्रित है कि मीडिया ट्रायल आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को कैसे प्रभावित करती है। शोध पत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के बीच टकराव पर प्रकाश डाला गया है।

Author :
डाॅ. आशुतोष मीणा :
एसोसिएट प्रोफेसर, लोकप्रशासन, राजकीय महाविद्यालय नांगल राजावतान (दौसा)।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.01.3

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