लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
भारत के चुनाव आयोग की बदलती भूमिकाः मुद्दे और चुनौतियां
By : अनिल कुमार
Page No: 18-33
Abstract
भारत के संविधान द्वारा स्थापित एक स्थायी और स्वतंत्र निकाय भारत निर्वाचन आयोग को देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के नाते, संसद और राज्य विधानसभाओं के आम चुनाव कराना भारत के चुनाव आयोग के लिए सहज काम नहीं है। हर चुनाव में एक खामी रह जाती है जो भारत के चुनाव आयोग को कुशल बनने और जनता की नजरों में एक बेदाग छवि बनाने में बाधा डालती है। चुनावों में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसे बुनियादी ढांचे, वित्त, कर्मियों, नागरिकों और मतदाताओं के बीच जागरूकता की कमी, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के साथ समन्वय, राजनीतिक दबाव, नामांकन दाखिल करना, धन और बाहुबल का दुरुपयोग, खर्च की सीमा, फंडिंग पैटर्न से संबंधित कई मुद्दे, राजनीति के अपराधीकरण की जाँच, चुनावी धोखाधड़ी, स्वच्छ मतदाता सूची तैयार करना, मतदाता सूची का दोहराव और भारत के चुनाव आयोग की रिपोर्ट का विश्लेषण आदि। भारत के चुनाव आयोग की पारंपरिक भूमिका और कार्य समय की आवश्यकता और प्रगति के अनुसार बदलते रहे हैं। भारत के चुनाव आयोग ने चुनावों में कदाचार की जाँच के लिए विभिन्न तरीकों से आवश्यक कदम उठाए हैं। यह पत्र आयोग की वास्तविक स्थितियों और समस्याओं को जानने का प्रयास करता है और भारत के चुनाव आयोग के सामने आने वाले मुद्दों, समस्याओं और चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन करता है। अध्ययन भारत के चुनाव आयोग की रिपोर्ट और कुछ प्रकाशित लेखों के माध्यम से किया गया है।
Author :
डाॅ अनिल कुमार : सहायक आचार्य लोकप्रसासन विभाग, सी. डी. ओ. ई. एजुकेशन, पंजाब विश्वविधालय, चंडीगढ़।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2024.16.01.2