लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
दफन होती जलनिधियाँः राजस्थान की जल-संस्कृति, समाज और विकासात्मक राज्य के संदर्भ में एक अध्ययन
By : रेखा कुमारी
Page No: 146-156
Abstract
जल वह बहुमूल्य संपत्ति हैं जिस पर संपूर्ण मानव सभ्यता का भूत, भविष्य व वर्तमान निर्भर करता है। यही कारण है कि विश्व में जितनी भी सभ्यताओं व संस्कृतियों का विकास हुआ वह मुख्यतः जल स्त्रोतों के आस पास ही हुआ। पृथ्वी पर मानव जीवन की उत्पत्ति के समय से ही मानव व प्रकृति के बीच एक प्रकार का रहस्य रहा है। परंतु आधुनिकता व पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप जिस प्रकार की तार्किकता व मानव बुद्धि का विकास हुआ उसने मानव व प्रकृति के बीच विद्यमान इस रहस्य को उद्घाटित करते हुए मानव मात्र को प्रकृति का दोहनकर्ता बना दिया है और आज स्थिति इतनी विकराल हो गई है कि मानव बुद्धि द्वारा निर्मित यही ज्ञान, आज उसी के अस्तित्व के लिए संकट उत्पन्न करने लगा है।1 इसी पृष्ठभूमि के संदर्भ में हमारा यह लेख विशेष रूप से राजस्थान में जल संकट की स्थिति का मूल्यांकन करते हुए, विकासात्मक राज्य व नागरिक समाज के बीच के अंतरसंबंधों का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता इसके अतिरिक्त जल प्रबंधन व संरक्षण के संबंध में सदियों से लगे समाज की भूमिका का मूल्यांकन करते हुए, नागरिक समाज के संबंध में विद्यमान एकल समझ व विचार को पुनः परिभाषित कर नागरिक समाज की एक संदर्भ आधारित समझ प्रस्तुत करने की दिशा में एक प्रयास है।
Author :
रेखा कुमारी : पीएचडी शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.04.11