लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
दिल्ली की राजनीति में विभिन्न जातीय-धार्मिक समुदायों की भूमिकाः विधानसभा चुनावों के विशेष सन्दर्भ में
By : राकेश कुमार , सिद्धार्थ मुखर्जी
Page No: 124-145
Abstract
दिल्ली राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र रही है। आजादी के बाद दिल्ली की जनसांख्यिकी में कई परिवर्तन आए हैं, अगस्त 1947 में लगभग पाँच लाख शरणार्थी दिल्ली आए थे (राज एवं सहगल, 1961)। दिल्ली की जनगणना के आंकड़ों में, 1941-51 के बीच, दिल्ली की जनसंख्या में 90 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि हुई, जबकि देश के बाकी हिस्सों में 13 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी (राज एवं सहगल, 1961)। इसके पश्चात् मुख्य रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश से लोगों के तेजी से प्रवासन के परिणामस्वरूप दिल्ली के मतदाताओं की सामाजिक संरचना में बदलाव आया है। देश के अन्य राज्यों से भी लोग रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं। हालाँकि यह प्रवासी मतदाता एक जातीय समूह से नहीं हैं और अपने मूल निवास स्थान, अपनी जाति और अपनी भाषा के संबंध में काफी विविधता रखते हैं। अलग-अलग राज्यों से आने वाले यह लोग दिल्ली में विभिन्न जातीय व धार्मिक समूहों का निर्माण करते हैं या अपने समूहों को संख्यात्मक मजबूती प्रदान करते हैं। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या यह लोग अपने राज्य में जिस सामाजिक समूह से सम्बंधित होते हैं, दिल्ली में भी उसी समूह से प्रभावित होकर मतदान करते हैं? या दिल्ली में उनकें मतदान व्यवहार में कुछ अंतर होता है? क्या किसी समूह के मतदान व्यवहार में कोई स्थाई प्रतिरूप है? अथवा कोई समूह सामूहिक तौर पर किसी दल के प्रति आकर्षित रहा है? इस अध्ययन में दिल्ली के विभिन्न जातीय, धार्मिक समूहों के मतदान व्यवहार का अध्ययन किया गया है तथा उनके मतदान व्यवहार के प्रतिरूप का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।
Authors :
राकेश कुमार : शोध छात्र, राजनीति विज्ञान विभाग, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ।
सिद्धार्थ मुखर्जी : सह-आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ।
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.04.10