लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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बिहार के खनिज संसाधनों का भौगोलिक सर्वेक्षण: बिहार के विकास के संदर्भ में नीति-निर्माण हेतु रोडमैप

By : शशि भूषण

Page No: 103-123

Abstract
झारखंड निर्माण के बाद आम धारणा बन गयी कि बिहार खनिज संपदा की दृष्टि से निर्धन प्रदेश रह गया है। जबकि भौगोलिक-भूवैज्ञानिक यथार्थ यह है कि यद्यपि लौह-अयस्क, ताम्र-अयस्क एवं बॉक्साइट सदृश अनेक प्रकार की खनिज संपदा के व्यापक भंडार झारखंड के हिस्से में चले तो गए, तथापि धात्विक (हेमेटाइट व मैग्नेटाइट सदृश लौह धातुएँ, ताँबा व सीसा जैसी अलौह धातुएँ, बॉक्साइट प्रभृती हल्की अलौह धातु व सोने के रूप में बहुमूल्य अलौह धातु), अधात्विक (अभ्रक, एसबेस्टस, गंधक, चूना-पत्थर, बेराइट, क्षारीय नमक, सोडियम नमक, पोटाश, विविध प्रकार की मृत्तिकाएँ साधारण मृत्तिका, चीनी मिट्टी, अग्निसह मृत्तिका, मुल्तानी मिट्टी व सुघत्य मिट्टी, भवन निर्माण के पत्थर ग्रेनाइट, ग्रेनाइट-नीस, लैटेराइट, बालू-पत्थर, क्वाटर््जाइट व स्लेट, अलंकारी चट्टान, रोड मेटल, बहुमूल्य पत्थर व खनिज-जलस्रोत), आणविक (यूरेनियम, थोरियम, कोलम्बियम-टैन्टेलम, बेरिल व ग्रेफाइट) तथा अन्य प्रकार के खनिज संसाधनों (डोलोमाइट, फेल्सपार, सिलिका बालू, बालू-पत्थर, ट्रिपलाइट व काँच निर्माण के खनिज) का बिहार में उल्लेखनीय संचयन के साथ ही उनकी मौजूदगी की अतिरिक्त संभावनाएँ भी विद्यमान हैं। इस अध्ययन में बिहार के खनिज संसाधनों का गहन भौगोलिक सर्वेक्षण करते हुए नीति-निर्माण हेतु रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। उपयुक्त सरकारी नीति-निर्माण व कुशल तकनीक का तार्किक अनुप्रयोग करके खनिज संसाधनों की उपलब्धता की पुष्टि करके उनका समुचित उत्खनन किया जाना समय की माँग है। इससे राज्य के औद्योगिक सह आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

Author :
शशि भूषण : वैज्ञानिक, पर्यावरण शोध एवं ग्रामीण विकास संस्थान, पटना।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.04.9

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