लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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एक नेतृत्वकर्ता के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी, राजनेता, सांसद एवं प्रधानमंत्री

By : श्रीप्रकाश सिंह , धारासिंह कुशवाहा

Page No: 1-14

Abstract
स्वाधीनता पश्चात काल में, भारतीय लोकतंत्र की दशा एवं दिशा के निर्धारण में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। एक राजनीतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने भी राजनेता, सांसद, विदेश मंत्री तथा प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भारत की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के कार्यचालन के सन्दर्भ में अपना विशेष योगदान दिया है। वास्तव में, एक राजनीतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान बहुआयामी रहा है।
   स्वाधीन भारत के राजनीतिक मानचित्र पर, अटल बिहारी वाजपेयी ने एक राजनेता की भूमिका में करीब पाँच दशक से अधिक का समय बिताया। अक्सर उन्हें आपसी सहयोग एवं सामंजस्य पर आधारित राजनीतिक नेतृत्व शैली संबंधी विशेषताओं के लिए याद किया जाता रहा है। अपनी विलक्षण वाक्पटुता एंव तर्कसंगत टीका-टिप्पणी की योग्यता के चलते, अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय संसदीय संस्थाओं के सुसंगत संचालन में वृहद, विशेष एवं उल्लेखनीय योगदान दिया है। व्यावहारिक राजनीति में भी, पहले भारतीय जनसंघ तथा बाद में भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अपनी पार्टी की राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी राजनीतिक यात्रा के चरम पर, अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय लोकतंत्र के ‘शीर्ष राजनीतिक नेतृत्वकर्ता’ की भूमिका भी निभाई और तीन बार प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला।

Authors :
श्रीप्रकाश सिंह:  आचार्य, राजनीतिक विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।
धारासिंह कुशवाहा: शोधार्थी, राजनीतिक विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.04.1

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