लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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लोक केन्द्रित प्रशासन के वर्तमान अस्थायी प्रयास और स्थायी तन्त्र की संभावनाएँ

By : जोरावर सिंह राणावत

Page No: 97-114

Abstract
लोक प्रशासन शब्द का अर्थ स्वयं में ही लोक केन्द्रित प्रशासन है तथा जिसका अर्थ जनता के लिए प्रशासन से लगाया जा सकता है। प्रशासन के प्रमुख लक्षणों में से एक विकेन्द्रीकरण है जो शासन का अन्तिम व्यक्ति तक पहुँचना सुनिश्चित करता है। प्रशासन को पारदर्शी, प्रभावशाली, कार्यकुशल, भ्रष्टाचार मुक्त एवं सुशासन बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य जनता की इस तक पहुँच कोे सुगम बनाना तथा सेवा प्रदायगी और शिकायत निवारण को त्वरित बनाना है। इसे ही सुशासन एवं कुशल प्रशासन कहा जाता है और इसे ही रामराज की संज्ञा भी दी जाती है। प्रत्येक सरकार स्वयं को ऐसा बनाने और जनता तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कई प्रयास करती हैं। वर्तमान में भी विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा प्रशासन आपके द्वार, शासन आपके संग जैसे अस्थायी प्रयास के द्वारा जनता की शिकायतों का निवारण किया जाता है और जनता के लिए सेवा प्रदायगी सुनिश्चित की जाती है। प्रस्तुत लेख में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा चलाये जा रहे ऐसे कार्यक्रमों का अनुभवमूलक मूल्यांकन प्रस्तुत करते हुए इनकी कमियों को उजागर करने का प्रयास किया है।

प्रस्तुत लेख में यादृच्छिक निदर्शन विधि द्वारा 100 व्यक्तियों का निदर्श के रूप में चुनाव किया गया है जिसमें समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इनसे प्राप्त अनुभवमूलक प्रतिक्रियाओं द्वारा लोक केन्द्रित प्रशासन के लिए सरकार द्वारा किये गये अस्थायी प्रयासों का विश्लेषण करते हुए स्थानीय स्तर पर एक स्थायी तन्त्र के विकास का माॅडल प्रस्तुत किया है जिसमें लोक केन्द्रित शिकायत निवारण एवं सेवा प्रदाता केन्द्र की स्थापना का प्रावधान किया है। यह केन्द्र स्थानीय स्तर की समस्त सेवाओं तथा शिकायतों के निवारण के लिए ’सिंगल विण्डो’ की तरह विकसित किया जा सकता है। लेख में इस केन्द्र की स्थापना में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करते हुए उनके निवारण के लिए समाधान भी प्रस्तुत किये गए हैं।

Author
जोरावर सिंह राणावत: सहायक आचार्य एवं सहायक अधिष्ठाता, राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग, कला एवं मानविकी संकाय, संगम विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.03.6

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