लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारत में लोक केन्द्रित प्रशासनः सिद्धान्त एवं व्यवहार

By : अखिलेश कुमार जायसवाल

Page No: 80-96

Abstract:
21वीं सदी में हम एक ऐसे राज्य में रह रहे हैं जिसे प्रशासकीय राज्य भी कहा जाता है, जो मानव जीवन के हर पहलू को किसी न किसी रूप में प्रभावित करता है। प्रशासकीय राज्य को लोककल्याणकारी बनाने हेतु शासन-प्रशासन के जन केन्द्रित होकर कार्य करने पर बल दिया जाता है और इसी कारण लोक केन्द्रित प्रशासन की अवधारणा ने जन्म लिया जिसमें जन कल्याण को प्रशासन के केन्द्र में रखा जाता है। भारत की प्रशासनिक व्यवस्था लोक केन्द्रित होने की दिशा में निरन्तर अग्रसर है और भारतीय प्रशासन को लोक केन्द्रित बनाने हेतु अनेक उपाय किए गए हैं, जैसे- संवैधानिक प्रावधान, कानून-निर्माण द्वारा लोक संस्थाओं का गठन- लोक शिकायत निदेशालय, नागरिक चार्टर्स, लोकपाल व लोकायुक्त, मुख्य सतर्कता आयुक्त, सूचना का अधिकार, विभिन्न आयोग एवं न्यायाधिकरण एवं सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देश व योजनाएँ। इन सबके बावजूद अभी भी भारत की प्रशासनिक तंत्र में अनेक व्यवस्थागत खामियां व्याप्त हैं, जैसे-भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, लालफीताशाही, आमजन के प्रति लोक सेवकों का उदासीन रवैया, प्रशासन में राजनैतिक हस्तक्षेप आदि। लेकिन तकनीकी क्रान्ति व आमजन की जागरूकता ने धीरे-धीरे प्रशासन को लोक केन्द्रित होकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।

Author:
अखिलेश कुमार जायसवाल: असिस्टेन्ट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, हिन्दू पी0 जी0 काॅलेज, जमानियाँ, गाजीपुर, उ0 प्र0-233131,
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.03.5

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