लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारतीय लोकतंत्र के सशक्त आयाम

By : संतोष कुमार सिंह

Page No: 17-40

Abstract
किसी भी राष्ट्र की प्रगति निश्चित रूप से उसके शासन व्यवस्था पर निर्भर करती है। इस दृष्टि से लोकतंत्र ही वह उत्तम शासन व्यवस्था है जिसमें सभी के मानवाधिकार सुरक्षित रह सकते हैं । लोकतंत्र उन महत्वपूर्ण और बहुमूल्य उपहारों में से एक है जिसे सभ्यता ने मानव जाति को दिया है और जिसका सम्मान पूरी दुनिया की बहुसंख्यक आबादी करती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की लोकप्रियता एवं महत्व का सार सूत्र है- मनुष्य के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास। लोकतांत्रिक व्यवस्था की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, आविर्भाव एवं स्थायित्व का संवाहक तत्व संविधान का आदर-सम्मान, स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार, पंथनिरपेक्षता, विधि का शासन, शासन के अंगों के मध्य सामंजस्य, सत्ता का विकेन्द्रीकरण आदि तत्व मिलकर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की गतिविधियाँ हमेशा जनसरोकार की दिशा में क्रियाशील रहती हैं। इसमें सत्ता मशीनरी के माध्यम से निरंतर प्रयास किया जाता है कि एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था कायम की जा सके जिसमें एक कल्याणकारी राज्य स्थापित हो। भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है क्योंकि भारत को आजाद हुए 75 वर्ष पूर्ण हो चुके है, जो निश्चित रूप से भारतीय लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। जनादेश से सत्ता में बदलाव बहुत व्यवस्थित और सहज ढंग से हुआ है। भारत में लोकतंत्र का विकास सदियों का परिणाम है। भारत ने एक ऐसे लोकतंत्र का अपनाया है जिसमें मर्यादा, संयम और अनुशासन की झलक दिखाई देती है। दूसरी ओर आधुनिक भारत को ऐसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है, जिससे भारत की दशा और दिशा के सुनिश्चित प्रतिमान निर्धारित नहीं हो पा रहे हैं। इन चुनौतियों में शामिल हैंः सामाजिक-आर्थिक असमानता, गरीबी, बेरोजगारी,अशिक्षा, जातिवाद, साम्प्रदायिकता, जनसंख्या वृद्धि, क्षेत्रवाद, भ्रष्टाचार, आंतकवाद, नक्सलवाद आदि। यदि समय रहते भारत की अनेक चुनौतियों का समाधान नहीं किया गया तो भारतीय लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह सकता।

Auhors :
डाॅ संतोष कुमार सिंह :
असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, रानी धर्म कुँवर राजकीय महाविद्यालय, दल्लावाला, खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) 
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.03.2

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