लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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नागरिक-केंद्रित प्रशासनः समस्याएं और संभावनाएं

By : देवेन्द्र प्रताप तिवारी

Page No: 1-16

Abstract
संविधान की प्रस्तावना सभी नागरिकों के लिए सामाजिक न्याय और आर्थिक अवसर सुनिश्चित करती है। इसके अलावा, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत हमारे नागरिकों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस संबंध में, प्रशासनिक तंत्र संविधान की भावना के अनुसार कार्य करने के लिए उत्तरदायी है। हमारा संविधान प्रशासन को नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की दिशा देता है। भारत में लोक नीतियों को तैयार करने के साथ-साथ इसके कार्यान्वयन में सिविल सेवक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रबंधकीय ढांचे की रीढ़ हैं। उनके कार्यक्षेत्र में न्यायपालिका से लेकर स्वास्थ्य सेवा, भूमि से लेकर समुद्र तक और जीवन के लगभग हर क्षेत्र से जुड़े मामलों का प्रबंधन शामिल है। राज्य एवं सरकार के अधिकांश लक्ष्य इन अधिकारियों के प्रदर्शन से जुड़े हैं, जो विभिन्न क्षमताओं, विभिन्न पृष्ठभूमि और पर्यावरण से आते हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में भारत में नागरिक-प्रशासन की चुनौतियों एवं संभावनाओं का वर्णनात्मक एवं  विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।

Authors :
देवेन्द्र प्रताप तिवारी : सहायक प्राध्यापक, राजनीति विज्ञान, एस. एल. के. काॅलेज, सीतामढ़ी, (बी. आर. ए. बिहार, विश्वविद्यालय की एक अंगीभूत इकाई)।
 

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.03.1

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