लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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स्थानिक राजनय, लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण एवं लोकप्रशासन

By : मीना रानी

Page No: 104-115

Abstract
राजनय या कूटनीति का स्थानीयकरण कोई नई राजनीतिक अवधारणा नहीं है। इसे पैराडिप्लोमेसी अथवा स्थानिक राजनय कहा जाता है। स्टीफन वोल्फ ने पैराडिप्लोमेसी को ‘उप-राज्य संस्थाओं की उनके महानगरीय राज्य से स्वतंत्र विदेश नीति में उनकी भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में उनके अपने स्वयं के अंतरराष्ट्रीय हितो की खोज में उनकी विदेश नीति क्षमता‘ के रूप में वर्णित किया है। वोल्फ के लेखन में उप-राज्य संस्थाओं की उभरती नीति क्षमता के रूप में पैराडिप्लामे ेसी का आनंद संधो के राज्यों (या प्रांतों और क्षेत्रों) और स्वायत्त इकाई दोनों द्वारा किया जाता है। दुनिया के अलग-अलग देशों में  कूटनीति का यह स्वरूप पिछले दो-तीन दशक में अधिक प्रचलन में आया है। एक लोकतांत्रिक संघीय प्रणाली वाले राष्ट्र के भीतर स्थानीय सरकारों की सक्रियता एवं आर्थिक बदलावों ने कूटनीति के स्थानीयकरण की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है। व्यापार एवं निवेश से सम्बंधित आर्थिक कूटनीति में अमेरिका, कनाडा, बेल्जियम, स्पेन, जापान, दक्षिण कोरिया और यहां तक कि चीन एवं रूस जैसे अधिनायकवादी देशो में स्थानिक कूटनीति लोकप्रिय हो चुकी है। इस आलेख के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया हैं कि भारत में भी र्कइ  राज्य सरकारों ने पैराडिप्लोमेसी के माध्यम से देश की विदेश नीति को प्रभावित करने के साथ-साथ अपने लिए आर्थि क अवसरों में वृद्धि की है । स्थानिक राजनय से लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण को गति मिलती है जिसका प्रभाव लाके प्रशासन की पद्धतियों पर पड़ना स्वाभाविक है। 

Author :
मीना रानी : सहायक आचार्य, लोक प्रशासन विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर।

DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.02.7

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