लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
भारतीय लोकतंत्र में संविधान की केन्द्रियता
By : अभय प्रसाद सिंह , कृष्ण मुरारी , रूपक कुमार
Page No: 1-16
Abstract
इस आलेख का उद्देश्य संविधान में निहित उन मूल्यों को समझना है जिसकी प्रासंगिकता मतदाताओं की आकांक्षाओं एवं संसाधनों की उपलब्धता के राजनीतिक अर्थशास्त्र के सन्दर्भ में संवादित है। संविधानिक लाके तंत्र के केंद्र में पंथनिरपेक्षता, बंधुत्व, सामाजिक न्याय, संघवाद, स्वायत्त एवं संवैधानिक संस्थाएँ बहुदलीय प्रणाली और शक्तियों के पृथक्करण, आदि सार्वभौमिक मूल्य के रूप में अभिव्यक्त हैं। इस शोध आलेख में संविधानिक भारतीय लाके तंत्र के इन्हीं कुछ मूल्यों के अवश्यम्भाविता का परीक्षण किया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबद्ध आयाम जैसे संविधान का देश के सर्वोपरि विधि संहिता एवं इससे जनित संविधानवाद की बहस, संविधानवाद के वैकल्पिक प्रारूप की संभाव्यता का विमर्श , आदि का इस शोध आलेख में विश्लेषण किया गया है।
Authors :
प्रोफेसर अभय प्रसाद सिंह : (पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
डॉ. कृष्ण मुरारी : (शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
डॉ. रूपक कुमार : (शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय)
DOI: https://doi.org/10.32381/LP.2023.15.02.1