लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal
Association with Indian Institute of Public Administration
Current Volume: 17 (2025 )
ISSN: 2249-2577
Periodicity: Quarterly
Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर
Subject: Social Science
DOI: https://doi.org/10.32381/LP
उत्तराखण्ड की आदिम जनजातिः वनराजी (वनरावत/वनरौत) की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति
By : डा0 घनश्याम जोशी , डा0 दीपक पालीवाल
Page No: 139-148
Abstract
उत्तराखण्ड में मुख्यतः पाचं प्रकार का जनजाति समाज रहता है। जिसमें भोटिया,थारू, जौनसारी, बोक्सा और वनरावत या वनराजी हैं। पहले चार प्रकार की जनजाति समाज अपने प्राकृतिक स्वरूप, परम्पराओं और मान्यताओंके साथ आधुनिक समाज मेंरच-बस गया है। किन्तु एक जनजाति समाज जिसे वनरावत या वनराजी नाम से जाना जाता है, समाज की मुख्य धारा से बहुत दूर रहा और अल्पतज्ञात के कारण आदिम जनजाति की श्रेणी में बना रहा्। इस शोध-पत्र के माध्यम से आदिम जनजाति, वनरावत का समाज की मुख्य धारा में जुड़ने और इससे उनके सामाजिक और राजनीतिक स्थिति में आए बदलावो का अध्ययन करना है। यह जनजाति उत्तराखण्ड की अन्य जनजातियों से इस मामले में भिन्न है। इनकी जनसंख्या कुछ सैकड़ों में ही बची है और इनके विलुप्त होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
Authors :
डा0 घनश्याम जोशी : सहायक प्राध्यापक, लोक प्रशासन विभाग, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, राजकीय महाविद्यालय, दल्लावाला, खानपुर, हरिद्वार, उत्तराखंड ।
डा0 दीपक पालीवाल : सहप्राध्यापक, समाज शास्त्र विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।