लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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विश्व आधिपत्य की लालसाः यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की अवांछनीय भूमिका

By : डा0 पकंज लखेरा

Page No: 113-124

Abstract
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति की प्रमुख घटनाओं में से एक है। यह वैश्विक तनाव पैदा कर रहा है, हथियारो की होड़ बढ़ा रहा है, दुनिया के विभिन्न हिस्सों मे सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है और यहां तक कि परमाणु संघर्ष में भी समाप्त हो सकता है। आर्थिक रूप से यह न केवल युद्धरत राष्ट्रों के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक आपदा होगी। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में तेल, प्राकृतिक गैस, खाद्यान्न, मोटल और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति में कमी आ रही है क्योंकि रूस और यूक्रेन इन सभी वस्तुओं के प्रमुख निर्यातक हैं। बढ़ती मुद्रास्फीति के परिणामस्वरूप दुनिया के विभिन्न हिस्सो में धीमी आर्थिक वृद्धि, बढ़ती गरीबी और बढ़ती भूख हो अवश्यंभावी है। संक्षेप में कहें तो युद्ध विश्व व्यवस्था को काफी हद तक बदल सकता है। यूक्रेन वस्तुतः एक युद्ध का मैदान बन गया है जहाँ दुनिया की प्रमुख शक्तियाँ अपनी सेन्यें तकनीकी शक्ति का प्रदर्श न कर रही हैं। सामान्यतया, नाटो में शामिल होने या न होने के लिए यूक्रेनी संप्रभुता के सवाल पर युद्ध लड़ा जा रहा है। लेकिन, पूरी स्थिति का गहन विश्लेषण एक अलग तस्वीर पेश करता है। एक युद्ध जो रूस यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं होने देने के लिए लड़ रहा है, एक युद्ध जो यूक्रेन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए जारी किए हुए है, एक युद्ध जिसे अमेरिका लोकतंत्र के नाम पर प्रायोजित कर रहा है। एक ऐसा युद्ध जहां अमेरिका केवल अपने राष्ट्रीय हितो को देख रहा है और पूरी दुनिया को दांव पर लगा दिया है । यह शोध पत्र वर्तमान स्थिति में अमेरिका की भूि मका का विश्लेषण करना चाहता है। क्या अमेरिका लोकतंत्र और विश्व व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है या वह सिर्फ रूस को कमजोर करना चाहता है और युद्ध के बढ़ने के माध्यम से अपना विश्व आधिपत्य जारी रखना चाहता है? क्या अमेरिका के लिए यह बुद्धिमानी होगी कि वह रूस पर अधिक ध्यान केंद्रित करे और उस वास्तविक चुनौती को नजरअंदाज करे जो बढ़ते चीन के रूप में है?

Author :
डा0 पकंज लखेरा :
सह­आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग, स्वामी श्रद्धानंद काॅलेज दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
 

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