लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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शिक्षा नीति एवं शिक्षानीति की प्रासगिकता 

By : कु0 वीणा कुमारी , डा0 गजानंद सिंह

Page No: 104-112

Abstract
किसी भी समाज या देश की प्रगति में शिक्षा का धुरीय महत्व होता है। भारतीय शिक्षा कामोबेश मेकाॅले की विरासत को आज भी ढो रही है। परन्तु उसमें आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। आज जरूरत है एक आवश्यकता एवं कौशल आधारित शिक्षा की जो भारतीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों तथा भारतीय संस्कृति के अनुरूप हो। साथ ही इसमें महिलाओं के मानवाधिकारों की संरक्षा के उत्क्रम भी हो क्योंकि शिक्षा ही व्यक्ति को उचित-अनुचित, नैतिक-अनैतिक आदि मूलयो का ज्ञान करवाती है तथा अपने अधिकार व कर्तव्यो का बोध करवाती है जिससे एक सभ्य समाज का निर्माण होता है। इसी वैचारिक पृष्ठभूमि में प्रस्तुत आलेख प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था एवं महिलाओं के शिक्षा संबंधी अधिकारो  के आलोक में वर्तमान शिक्षा नीति 2020 के परीक्षण का एक प्रयास है। प्रस्तुत अनुशीलन से यह उजागर होता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था की तरह महिलाओ  के शिक्षा संबंधी अधिकारो के अनुरूप है।

Authors :
कु0 वीणा कुमारी :
शोध छात्रा, राजनीति विज्ञान विभाग, जी.बी. काॅलेज, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, बिहार। 
डा0 गजानंद सिंह : आचार्य, अध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, रामगढ़ कैमूर , बिहार।
 

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