लोक प्रशासन - A UGC-CARE Listed Journal

Association with Indian Institute of Public Administration

Current Volume: 17 (2025 )

ISSN: 2249-2577

Periodicity: Quarterly

Month(s) of Publication: मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर

Subject: Social Science

DOI: https://doi.org/10.32381/LP

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भारतीय श्रमिक आंदोलन के समक्ष चुनौतियाँः अतीत से वर्तमान तक

By : डा0 रूणा आनंद

Page No: 73-89

Abstract
श्रमिक आंदोलन का विकास स्वतत्रंता पूर्व ब्रिटिश शासन, भारतीय राजनैतिक विचारधारा एवं विश्व-पटल पर होने वाले श्रमिक आंदोलनो या परिवर्तनों से प्रभावित था। कालांतर में, विभिन्न प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिए समय-समय पर श्रमिक आंदोलनो के द्वारा, राज्य की ओर से सहायता प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाता रहा  है। श्रमिक आंदोलन की सफलता राज्य और पूंजीपतियो द्वारा दी गई प्रतिक्रिया पर निर्भर  करती है। मुख्यतः यह आंदोलन श्रम, पूंजी और सरकार के अन्यान्याश्रित संबंध पर निर्भर है। श्रमिक अपने श्रम से पूंजी निर्माण करते है और उस पूंजी में संतोषजनक भाग मिलने की उम्मीद करते है। राज्य से उन्हें यह अपेक्षा रहती है कि, राज्य उनके मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों कि रक्षा कर संरक्षण और संवर्धन में भी सहयोग करें। राज्य, श्रम और पूंजी के इस संबंध ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से, मुख्य रूप से उदारीकरण और वैश्वीकरण के समय श्रमिक आंदोलन के स्वरूपों और उदेश्यो को अत्याधिक प्रभावित किया है। यह शोध -पत्र सिर्फ औपचारिक श्रमिकों तक सीमित है। जिनका विश्लेषणात्मक एवं विवरणात्मक अध्ययन किया गया है लेकिन वर्तमान में अनौपचारिक श्रमिकों के  आंदोलन की बदलती भूमिका के कारण यथायोग्य अति संक्षिप्त में उन पर भी प्रकाश डाला गया है।

Author :
डा0 रूणा आनंद : 
सहायक आचार्या, अध्यक्ष, राजनीति शास्त्र विभाग, वैशाली महिला कॉलेज, बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, बिहार।
 

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